Friday, September 20, 2024

न से नफरत लिखने वालोप से प्यार भी लिखना सीखोप से पुल बनाओ खाई परप से प्रेम के धागे जोड़ो ह हीन बोध को छोडोंह से अब हुंकारे सीखोब से बुरी बहुत बदमाशी यह समझो और लो शाबासीब से बांधो नेह के बंधनखोलो गांठे सभी अपावनहर घर में उजियार अंधेरा सांप पकड़ने बनो सपेराअ से अप्प दीप हो जाओउजियारे से प्रीत लगाओअंधियारों से रिश्ते तोड़ो सच समझो सच खुद से जोड़ोअपने लिए तो सब जीते हैऔरो को भी देना सीखोमरण मारना बहुत सरल हैजीवन देने के गुर सीखोसब को आता बड़ी बात क्या ?तलवारो से गले काटनासीखो ! सीख सको आ जाऐतलवारों से खेत जोतनागांव गली हर आंगन में तबखुशियों का मंगल छाएगाधरती पर्वत नदियां नाचेहर आंगन झूमे गाएगा घसिया तक ही नहीं उदासीपण्डिताईन ,भी बैठी भूखीभूख की जात कुजात न कोईभूख की चाहत केवल रोटी चैन प्रेम से मिल जाए बसमिले भले ही सूखी रूखीभूख भगाओ भय मिट्वाओकविता तब उपचार बनेगीमन महकाकर तन उमगाकरजीवन का उपहार बनेगीलिखने का श्रम सार्थक होगा सब की जैजै कार बनेगीसाम्यवाद हृदयों में होगा समाज की सरकार बनेगीपूंजी सबकी गांठ में होगीसमरसता सांसो में होगी कोई वाद विवाद न होगाउड़ान सभी पांखो में होगीहिले मिले और साथ चलेंएक यहीं संकल्प चाहिएसबका हित साधन साधक हो केवल वही विकल्प चाहिए मम

न से नफरत लिखने वालो
प से प्यार भी लिखना सीखो
प से पुल बनाओ खाई पर
प से प्रेम के धागे जोड़ो 
ह हीन बोध को छोडों
ह से अब हुंकारे सीखो
ब से बुरी बहुत बदमाशी 
यह समझो और लो शाबासी
ब से बांधो नेह के बंधन
खोलो गांठे सभी अपावन
हर घर में उजियार अंधेरा 
सांप पकड़ने बनो सपेरा
अ से अप्प दीप हो जाओ
उजियारे से प्रीत लगाओ
अंधियारों से रिश्ते तोड़ो 
सच समझो सच खुद से जोड़ो
अपने लिए तो सब जीते है
औरो को भी देना सीखो
मरण मारना बहुत सरल है
जीवन देने के गुर सीखो
सब को आता बड़ी बात क्या ?
तलवारो से गले काटना
सीखो ! सीख सको आ जाऐ
तलवारों से खेत जोतना
गांव गली हर आंगन में तब
खुशियों का मंगल छाएगा
धरती पर्वत नदियां नाचे
हर आंगन झूमे गाएगा 
घसिया तक ही नहीं उदासी
पण्डिताईन ,भी बैठी भूखी
भूख की जात कुजात न कोई
भूख की चाहत केवल रोटी 
चैन प्रेम से मिल जाए बस
मिले भले ही सूखी रूखी
भूख भगाओ भय मिट्वाओ
कविता तब उपचार बनेगी
मन महकाकर तन उमगाकर
जीवन का उपहार बनेगी
लिखने का श्रम सार्थक होगा 
सब की जैजै कार बनेगी
साम्यवाद हृदयों में होगा 
समाज की सरकार बनेगी
पूंजी सबकी गांठ में होगी
समरसता सांसो में होगी  
कोई वाद विवाद न होगा
उड़ान सभी पांखो में होगी
हिले मिले और साथ चलें
एक यहीं संकल्प चाहिए
सबका हित साधन साधक हो 
केवल वही विकल्प चाहिए 

मम29nov 23

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