Tuesday, September 17, 2024

कहन अच्छी है खयाल अच्छा है तो गज़ल भी अच्छी होती है कह गए शुकुल जी रामचंद्र भाषा संस्कृति की वाहक होती हैकबूतरो के फंसाने वाले शिकारी के कबूतर की कहानी सुनी हैउसे अंदाज ही नहीं उसी के कारण उसीकी कौम गुलाम होती हैकटते रहे हैं पेड़ कुल्हाड़ी में लगे अपने ही कुल के बेट के कारणउन पेड़ो मे फूल न खिलते जिनमे जिंदगी की आग नही होती है

 कहन अच्छी है खयाल अच्छा है तो गज़ल भी अच्छी होती है 
कह गए शुकुल जी रामचंद्र भाषा संस्कृति की वाहक होती है

कबूतरो के फंसाने वाले शिकारी के कबूतर की कहानी सुनी है
उसे अंदाज ही नहीं  उसी के कारण उसीकी कौम गुलाम होती है

कटते रहे हैं पेड़ कुल्हाड़ी में लगे अपने ही कुल के बेट के कारण
उन पेड़ो मे फूल न खिलते  जिनमे जिंदगी की आग नही होती है

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