शब्दो के जंगल में भटकना
, तर्को के तीखे कांटो से गुजरना ,
असहमति के खारे पानी से प्यास बुझाना ,
अनुभव होने तक
आस्था के पथरीले रास्तों पर
नंगे सिर
सिर के बल चलना
सब के बूते की बात नहीं है ।
7oct 2019
वह कौन? जिसे निष्कंटक पथ की चाह नहीं वह कौन ?कि जिसका प्रीत, प्रियं पाथेय नहीं सबकी अन्तर अभिलाषा है अजातशत्रु होना किंतु धर्म-दुविधा-संकट के हल तो ज्ञात नहीं
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