अब पद्यश्री विभूषित
हमारे प्रिय बाबा योगेन्द्र
मनुज हित में कला होजाए
यह पुरुषार्थ कर डाला
राष्ट्रहित हो कला साधन
जगत में भाव भर डाला
सभी के ह्रदयप्रिय महेन्द्र
हमारे प्रिय बाबा योगेन्द्र
दधीचि सम संकल्पित साध
भीष्म सम दृढता अनत अगाध
संघ साधना है सर्वोपरि
स्वयं से सिद्ध कर डाला
लोकमें करुणामय सत्येन्द्र
हमारे प्रिय बाबा योगेन्द्र
अहा यह उज्जवल देवमूर्ति
हृदयों में बसी प्रेम सत्कीर्ति
मातृवत सबको दुलराने
स्वयं को होम कर डाला
अनुष्ठानों के प्रज्ञा केन्द्र
हमारे प्रिय बाबा योगेन्द्र
अपरिग्रह जहां विनीत हुआ
प्रवास ही जीवन गीत दुआ
मधुरतम शब्दों का आगार
कला पाती जिनसे श्रृंगार
कलाधर निश्छल स्वयं मृगेन्द्र
सर्वप्रिय बाबा श्री योगेन्द्र
पद्म श्री जिनसे आभा पाए
सरलता जिनको छू के आए
विनय होजाए विनत जहां
दृष्टि समरसता पाए यहां
जलज पंकज से ये पुष्पेन्द्र
हमारे प्रिय बाबा योगेन्द्र
जगदीश 'महामना"
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