जिनकी दृष्टि समान होती है
उनकी सृष्टि महान होती है
जिनके मन सध गई समता
उनकी व्यष्टि विवान होती है
मन की जब बात नहीं बनती
भौंह तन के कमान होती है
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वह कौन? जिसे निष्कंटक पथ की चाह नहीं वह कौन ?कि जिसका प्रीत, प्रियं पाथेय नहीं सबकी अन्तर अभिलाषा है अजातशत्रु होना किंतु धर्म-दुविधा-संकट के हल तो ज्ञात नहीं
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