वह कौन? जिसे निष्कंटक पथ की चाह नहीं वह कौन ?कि जिसका प्रीत, प्रियं पाथेय नहीं सबकी अन्तर अभिलाषा है अजातशत्रु होना किंतु धर्म-दुविधा-संकट के हल तो ज्ञात नहीं